रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का निर्णय…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक युगांतकारी निर्णय सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी (अमित ऐश्वर्या जोगी) को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा 2007 में दिए गए अमित जोगी की रिहाई के आदेश को ‘दोषपूर्ण और साक्ष्यों के विपरीत’ बताते हुए रद्द कर दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

मामले की पृष्ठभूमि और सीबीआई जांच :

हत्या का मामला : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामावतार जग्गी की 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

राजनीतिक रंजिश : सीबीआई जांच में यह सामने आया कि जग्गी 10 जून 2003 को एक विशाल एनसीपी रैली आयोजित कर रहे थे, जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके पुत्र अमित जोगी के लिए एक राजनीतिक खतरे के रूप में देखा जा रहा था।

  • पुलिस की भूमिका : प्रारंभ में राज्य पुलिस ने जांच की और पांच लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन सीबीआई ने बाद में खुलासा किया कि ये ‘फर्जी आरोपी’ थे जिन्हें असली अपराधियों को बचाने के लिए खड़ा किया गया था। इस मामले में पुलिस अधिकारियों (वी.के. पांडेय, आर.सी. त्रिवेदी और अमरीक सिंह गिल) को भी साजिश का हिस्सा पाया गया।

अमित जोगी : “साजिश के मुख्य सूत्रधार” – अदालत ने अमित जोगी को इस जघन्य अपराध का ‘मास्टरमाइंड’ करार दिया है। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि :

  • गोपनीय बैठकें : मई 2003 के दौरान रायपुर के होटल ग्रीन पार्क और मुख्यमंत्री निवास में कई बैठकें हुईं, जिनमें जग्गी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।
  • हत्यारों का प्रबंधन : अमित जोगी ने ही मुख्य शूटर चिमन सिंह को फोन कर रायपुर बुलाया था। चिमन सिंह के रहने की व्यवस्था उनके सहयोगियों द्वारा की गई थी।
  • धन का लेनदेन : हत्या के बाद, अमित जोगी ने अपने एक कर्मचारी रेजिनाल्ड जेरेमिया (PW-85) के माध्यम से चिमन सिंह को ₹5 लाख पहुँचाने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणियां अदालत ने अपने फैसले में निचली अदालत के तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अन्य सह-आरोपियों ने अमित जोगी को खुश करने के लिए उनकी जानकारी के बिना यह हत्या की थी।

  • सत्ता का प्रभाव : कोर्ट ने माना कि अमित जोगी मुख्यमंत्री के पुत्र होने के कारण इतनी प्रभावशाली स्थिति में थे कि उन्होंने पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर जांच को प्रभावित किया और फर्जी आरोपियों का प्रबंध किया।
  • साक्ष्यों में एकरूपता : कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब उन्हीं गवाहों और सबूतों के आधार पर अन्य 28 आरोपियों को सजा दी गई, तो मुख्य आरोपी (अमित जोगी) को उसी आधार पर बरी करना तर्कहीन और अवैध है।

सजा का ऐलान और आगे की कार्रवाई :

  • ​उम्रकैद: कोर्ट ने अमित जोगी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत आजीवन कारावास और ₹1,000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
  • सरेंडर का आदेश : वर्तमान में अमित जोगी जमानत पर हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उनके बेल बॉन्ड अगले तीन सप्ताह तक प्रभावी रहेंगे, जिसके भीतर उन्हें संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण (Surrender) करना होगा।
  • अन्य आरोपी : कोर्ट ने मुख्य शूटर चिमन सिंह, याहया ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी की सजा को बरकरार रखा है।

​यह फैसला छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा भूचाल लेकर आया है। कोर्ट ने अपने ‘हेड नोट’ में स्पष्ट संदेश दिया कि “न्याय प्रणाली में किसी एक प्रभावशाली आरोपी के पक्ष में कृत्रिम भेदभाव नहीं किया जा सकता, जब साक्ष्य सभी के लिए समान हों”।

  • फैसले की तारीख : 2 अप्रैल 2026
  • न्यायाधीश : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा 
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